गुरुवार, 14 अक्तूबर 2010

कन्या

जब धरती पाप का बोझ ढोती है
तो खुदा की आँख भी नम होती है

कोख में मार देते हैं
जब बेटी को माँ बाप
हर तरफ विपदा होती है
प्राकृतिक आपदा आती है
धरती काँप जाती है
अम्बर फट जाता है
बिजलियाँ गिरता है
गंगा भी पाप नहीं धोती है
हर तरफ विपदा होती है

कन्या देवी, कन्या दुर्गा,
कन्या पूजनीय होती है
कन्या को मरवाने वाली
खुद भी कन्या होती है
बेटी को मरवा कर के
क्यूँ पाप का बोझ ढोती है
हर तरफ विपदा होती है |

घर की रामायण

पहले दिन रामलीला देखने के बाद,
जब मैं घर पर आया...
तो मेरे बेटे ने कुछ इस तरह से फ़रमाया
कि पापा.... हम रामलीला में जो भी देख कर आयेंगे,
वही अपने घर पर कर के दिखायेंगे |
जैसे की आज रामजन्म हुआ है,
आप सोचिये आपके घर में भी बेटा पैदा हुआ है,
मैंने कहा ये तो ठीक है पर...
मैं राजा दशरथ नहीं बन सकता,
क्योंकि राजा दशरथ तो बड़ी हिम्मत वाले थे,
तीन तीन पत्नियाँ संभाले थे,
यहाँ तो एक भी भारी पड़ रही है !
ज़िन्दगी मुश्किल में गुज़र रही है,
कानूनी बंदिश होने के नाते से
दूसरी ला नहीं सकता,
और कहीं एक्सचेंज ऑफर ! नहीं है,
इसलिए बदलवा नहीं सकता |
दूसरे दिन बेटा बोला....
आज आप राम बनोगे
मम्मी ताड़का बनेगी,
और आपके हाथों से मरेगी
मैंने कहा तू क्या गज़ब ढा रहा है !
कैकयी को ताड़का बता रहा है ?
और तेरी जुबान बड़ी चलती है,
माँ क्या तुझे राक्षसों के खानदान की लगती है ?
आहिस्ता बोल... उसने सुन लिया
तो कोप भवन में चली जाएगी,
दो दिन भूखे रहना पड़ेगा
और बेटा खाली पेट नींद भी नहीं आएगी !
हम तो यहाँ रामायण की बात करते है,
वो महाभारत कर के दिखाएगी !
अगले दिन बेटा बोला...
बंद करो ये मुस्कुराना
आज आपको पड़ेगा वनों में जाना,
मैंने कहा चौबीस साल पहले
छोड़ कर आया था हरियाणा !
जिस तरह भगवान राम को,
माँ बाप की आज्ञा से पड़ा था
वनों में जाना उसी तर्ज़ पर,
हमारा भी तो हुआ था
दिल्ली में आना !
और उस दिन से आजतक
वनवास ही तो काट रहा हूँ !
बेटा बोला पर भगवान जी तो
जंगलों में गए थे,
यहाँ जंगल कहाँ है ?
तो मैंने कहा
किसी दिन पूरी दिल्ली घुमाऊंगा
तुम्हे दो टांगो पे चलते जानवर दिखलाऊंगा,
संवेदनाहीन जानवर, मानवताविहीन जानवर,
गर्दन और जेब काटते जानवर ,
दीमक की तरह देश को चाटते जानवर,
कानून से करते खिलवाड़ जानवर,
अबलाओं के इज्ज़त पर करते वार जानवर,
रक्षक से भक्षक बने जानवर,
गरीबों के खून से सने जानवर,
जहाँ इतने खूंखार जानवर रहते है
उसे जंगल नहीं तो क्या शहर कहते हैं ?
अगले दिन बेटा बोला
आज तो सीता को हरना पड़ेगा,
ये काम भी आपको करना पड़ेगा,
मैंने कहा ये काम मुझसे हो नहीं सकता
क्योंकि मैं एक कवि हूँ,
ना कि कोई नेता
आज रावण का काम नेता कर रहे हैं,
जनता बेचारी सीता है
उसी को हर रहे हैं |
त्रेता में तो एक रावण था
जिसे मारने के लिए,
भगवान् ने अवतार लिया
इस युग में इतने रावण हो जायेंगे
तो प्रभु किस किस को मारने आयेंगे ?
अब बंद करो ये सिलसिला
देखेंगे कल की रामलीला .....
अगले दिन बेटे ने दिखाया जोश
बोला आज आप हो जाओ बेहोश !
मैं आपका हुकम मान कर दिखाऊंगा
आपके लिए संजीवनी लाऊंगा,
मैंने कहा बेटा मैं तो उसी दिन से बेहोश हूँ
जिस दिन से होश संभाला है ....
मैंने तुम्हे बड़े चाव से बड़े लाड से पाला है,
लेकिन हर महीने फिर बेहोश हो जाता हूँ
जब तुम्हारे स्कूल की फीस भरने जाता हूँ |
अब तू जब बड़ा हो जायेगा,
अपने पैरों पर खड़ा हो जायेगा,
मेहनत और ईमानदारी रुपी संजीवनी लायेगा,
तब तेरा बाप होश में आएगा |
खैर रामलीला का आखिरी दिन आया,
सबने मिल कर रावण को जलाया,
तब मैंने बेटे को समझाया
कि सिर्फ रावण ही नहीं,
हिन्दुस्तान का हर आम आदमी जल रहा है,
कोई सब्जियों के दाम से,
कोई बिजली के बिल के झटकों से,
कोई पेट्रोल की कीमतों से,
कोई पानी के मटकों से,
कोई गैस के सिलेंडर से,
कोई आलू और चुकंदर से,
हिन्दुस्तान का हर आम आदमी
तिल तिल जल रहा है,
रावण तो जल कर
अगले साल फिर खड़ा हो जाता है,
पर आज का आम आदमी
जलता ही जाता है जलता ही जाता है .........|

ऊँट बैठता है...

नए ज़माने का ये दौर देखिये
ऊँट बैठता है किस ओर देखिये


लोक सभा चुनाव का परिणाम देखिये
यूपीए की जीत का सम्मान देखिये
राहुल का चल गया शबाब देखिये
अडवाणी का तू गया ख्वाब देखिये
लालू भी आ गया ऑन रोड देखिये
ऊँट बैठता है किस ओर देखिये

कामनवेल्थ गेम का ये हाल देखिये
मलबे से है दिल्ली बेहाल देखिये
भ्रष्टाचार की मिली है छूट देखिये
नेताओं ने मचाई है लूट देखिये
कॉमन मैन पर पद रहा जोर देल्किये
ऊँट बैठता है किस ओर देखिये

नेताओं की टेढ़ी मंदी चाल देखिये
नोच रहे जनता की खाल देखिये
भर रहे अपना ही पेट देखिये
देश को रहे है समेट देखिये
ये कौवे नाचे बन कर मोर देखिये
ऊँट बैठता है किस ओर देखिये

रानी की गली नहीं दाल देखिये
मल्लिका के कपड़ों का जाल देखिये
राखी के बिल्ली जैसे गाल देखिये
शिल्पा के चुम्बन का हाल देखिये
कर दे ये रात में ही भोर देखिये
ऊँट बैठता है किस ओर देखिये

बुश पर जूता फेंकने की हिम्मत देखिये
फिर उस जूते की कीमत देखिये
हमारी संसद में चलते लगातार देखिये
उन जूतों का भी खरीददार देखिये
मिट जायेगा देश से मंदी का दौर देखिये
ऊँट बैठता है किस ओर देखिये

हरियाणा के एक नेता की मोहब्बत देखिये
चंद्रमोहन से बना चाँद मोहम्मद देखिये
स्वार्थ के लिए बदला इसने धर्म देखिये
नहीं है इसकी आँखों में कोई शर्म देखिये
ढलती उम्र में जवानी का जोर देखिये
ऊँट बैठता है किस ओर देखिये

नोएडा देता हमको गलत सीख देखिये
निठारी के कंकालों की चीख देखिये
आरुशी के कत्ल का अंजाम देखिये
सीबीआई भी हो गयी नाकाम देखिये
गुडगांवा में गुर्दों का चोर देखिये
ऊँट बैठता है किस ओर देखिये

देश पर छाए युद्ध के ये बादल देखिये
ललकार रहा एक पड़ोसी पागल देखिये
दे रहा आतंकवाद का साथ देखिये
कर रहा अमन चैन बर्बाद देखिये
युद्ध हुआ तो देंगे जवाब मुहतोड़ देखिये
ऊँट बैठता है किस ओर देखिये

हमने जो किया वो सहन देखिये
अपनी किस्मत पर भी एक ग्रहण देखिये
करता रहा जिनका मैं सम्मान देखिये
वही कर रहे मुझे बदनाम देखिये
संबंधों की उलझी हुए सी डोर देखिये
ऊँट बैठता है किस ओर देखिये

खबरिया चैनलों की भरमार देखिये
खूब मसालेदार समाचार देखिये
एकता कर रही सब भंग देखिये
एक की पत्नी दूसरे के संग देखिये
ज्योतषियों में चल रही होड़ देखिये
ऊँट बैठता है किस ओर देखिये

पश्चिमी सभ्यता का प्रभाव देखिये
पति पत्नी में प्यार का आभाव देखिये
देश के बदलते हालात देखिये
शादी से ज्यादा तलाक देखिये
कोख में मरी बेटियों का शोर देखिये
ऊँट बैठता है किस ओर देखिये

बचपन में जो दिए वो संस्कार देखिये
माँ ने जो लुटाया वो प्यार देखिये
जवान बेटा एसी में सोता देखिये
माँ को वृद्धाश्रम में रोता देखिये
फिर भी दे दुआएं होकर भाव विभोर देखिये
ऊँट बैठता है किस ओर देखिये

दिशा दे समाज को ये कवि देखिये
अन्धकार मिटाने वाले रवि देखिये
बुराई सामने लाने का ये दम देखिये
हंसाएं तुमको पी कर अपना गम देखिये
श्रोताओं की तालियाँ पुरजोर देखिये
ऊँट बैठता है किस ओर देखिये

ब्लू लाईन

एक ब्लू लाईन बस ने,
दूसरी ब्लू लाईन बस से कहा
"बहन सेंच्युरी कब हो गयी
पता ही नहीं चला !
दूसरी ब्लू लाईन बस ने भी
लिया इस बात को खींच,
बोली "पचास तो निपटा दिए
अगस्त से अक्टूबर के बीच"
"हमने तो अपने रंग का
महत्व ही खो दिया है,
और मारने वाले से
बचाने वाला बड़ा होता है
इससे गलत साबित किया है |
क्योंकि जनता को बचाने की
जिम्मेवारी तो होती है सरकार की,
और मुख्यमंत्री होता है
सरकार का मुखिया,
लोगों को ब्लू लाईन बस से
कैसे बचाया जाये....
ये तो उसे भी नहीं पता !
हम सब में इस बात का बड़ा ही गुरुर है,
कि पूरा का पूरा मंत्रिमंडल हमारे सामने मजबूर है...
तब दूसरी बोली,
कि आम जनता को
मारने का दोष सिर्फ
हमे क्यों दिया जाता है?
हम अपनी मर्ज़ी से किसी को नहीं मारती,
जिसकी लिखी होती है,
वही तो हमारे नीचे आ जाता है !
और अगर किसी कि लिखी भी हो...
तथा वो सड़क पर आने से डरता है,
तो उसे कुचलने के लिए...
मजबूरन हमें फुटपाथ पर चढ़ना पड़ता है !
इस तरह दोनों बसें अपनी अपनी
कामयाबी के किस्से सुना रही थी,
मन ही मन मुस्कुरा रही थी
तब एक बोली,
"क्यों न अगला कार्यक्रम
योजनाबद्ध तरीके से किया जाये,
हम ब्लू लाईन बसों के लिए
एक चैम्पियनशिप का आयोजन किया जाये,
दैनिक चैम्पियन, साप्ताहिक चैम्पियन, मासिक चैम्पियन
और वार्षिक चैम्पियन को तो विशेष पुरस्कार दिया जाये...
जो बस किसी को जान से न मार पाई हो,
सिर्फ हाथ पैर तोड़ कर आयी हो,
उससे प्रोत्साहन पुरस्कार दिया जाये...
ताकि उसका होसला बढ़े
तथा ज्यादा बेहतर करने की प्रेरणा मिले,
इसमें एक विशेष कार्य किया जायेगा
बूढी और अनुभवी बसों को,
लाईफ़ टाईम अचीवमेंट पुरस्कार दिया जायेगा !
दोनों बसों कि बात सुन कर,
इस कवि ने कहा
"बहनों, तुम 'बस' हो बस.. 'बस' ही रहो
और दिल्ली की जनता को,
उसके हाल पर छोड़ दो
इनके लिए तुम यमराज ना बनो" !

शनिवार, 2 अक्तूबर 2010

बापू

एक बार फिर से आओ बापू
हमको कुछ सिखाओ बापू
अन्धकार में डूबे हैं
अब उजाले लाओ बापू


हर जगह देश में दंगे हैं
आतंकी लफंगे हैं
उग्रवाद फैलाते हैं
गोली बम चलाते हैं
हथियार इनसे छीन कर
अहिंसा का पाठ पढाओ बापू

एक बार फिर से आओ बापू
हमको कुछ सिखाओ बापू

विदेशी माल मंगाते हैं
शौंक से घर में लाते हैं
रोटी भाजी छोड़ कर
पिज्जा बर्गर खाते हैं विदेशी इनकी छुडवा कर
स्वदेशी सिखलाओ बापू
एक बार फिर से आओ बापू
हमको कुछ सिखाओ बापू

नेता
टेरीकोट अपनाते हैं
देश का पैसा लूट कर
स्विस में जमा करवाते हैं
उल्टे इनके धंधे हैं
हमाम में सारे नंगे हैं
धोती इनको पहनाओ बापू
एक बार फिर से आओ बापू
हमको कुछ सिखाओ बापू

(अगर मेरी आवाज़ बापू तक पहुँच रही हो तो उन्हें एक सन्देश देना चाहूँगा )

कि आंसू न बहाना बापू
नहीं आ सकते तो मत आना बापू
यहाँ सांडरस जैसे कई बैठे हैं
भगत सिंह को भिजवाना बापू
नेता सुभाष को भिजवाओ बापू
भारत देश बचाओ बापू
हमारा देश बचाओ बापू

अलादीन का चिराग

बचपन में अलादीन के चिराग की कहानी पढ़ी थी
चिराग की जिन्न से दोस्ती बड़ी थी
जिन्न उस चिराग में रहता था
वही काम करता था जो अलादीन कहता था
एक वो चिराग मुझे मिल गया
जैसे उसे रगडा तो मेरा कलेजा हिल गया
उसमे से एक बहुत बड़ा जिन्न निकला
और बोला "हुकम मेरे आका"

पहले तो मैं डरा, फिर उसकी आँखों में झाँका
पुछा कौन हो? कहाँ से आये हो ?
किसने भेजा है? क्या काम है?
वो बोला जिन्न हैं चिराग से आये हैं
आपने बुलाया है आपके गुलाम हैं
आज के बाद आपके साथ रहेंगे
वही काम करेंगे जो आप कहेंगे
कोई "हुकम मेरे आका"

मैंने सोचा कि आज इससे सबकुछ मांग लिया जाये
और अपनी ज़रूरतों को पूरा किया जाये
मैंने कहा मेरे लिए एक बहुत बड़ा घर बनाया जाये
जिसमे मैं और मेरा परिवार शान से रह पाए
जिन्न बोला मेरे आका
अगर मुझे घर बनाना आता
तो क्या मैं चिराग में ही रह जाता?
चलिए कोशिश भी करूँ तो मकान के लिए जगह कहाँ है?
पहले दिल्ली में प्लाट खरीद कर दिखाइए
फिर मुझसे मकान बनवाइए
हाँ मकान बनवाते वक्त एक काम और कीजियेगा
दिल्ली पुलिस और कारपोरेशन से सेटिंग खुद कीजियेगा
ये दोनों किसी कि बात नहीं मानते हैं
ये तो सिर्फ पैसे कि भाषा जानते हैं
कोई और "हुकम मेरे आका"

मैंने कहा मेरे लिए लजीज खाना लाया जाये
जिन्न बोला
ये भी कोई काम है ये तो बहुत ही आसान है
फटाफट टेलीफोन उठाइए
किसी अच्छे से रेस्टोरेंट का नंबर मिलाइए
जो चाहिए फ्री होम डिलेवरी से मंगवाइए
हाँ एक काम और कीजियेगा
मेरे लिए भी तीन चार तरह कि सब्जियां
और बीस बटर नान मंगवा लीजियेगा
बहुत दिनों से भूखा हूँ आज पेट भर के खाऊंगा
मैंने कहा पैसे ही नहीं है कहाँ से मंगवाऊंगा
जिन्न बोला, पैसे की क्या बात है
मुश्किल काम नहीं है पैसा कमाना
दिल्ली में कई जगह नकली नोट छपते हैं वहीँ से मंगवाना
पांच सौ का नोट ढाई सौ में आएगा
बिलकुल असली जैसा है कोई पहचान भी नहीं पायेगा
मैंने कहा जिन्न भाई ऐसा काम करूँगा तो पुलिस पकड़ लेगी
नकली नोट चलाने के जुर्म में अन्दर कर देगी
और आप यहाँ की पुलिस को नहीं जानते हैं
एक जुर्म में पकड़ेगी तो चार इलज़ाम और लगा देगी
या तो कार चोरी का मुकदमा चलाएगी
या किसी का हत्यारा बता देगी
आप मुझ पर रहम खाइए
मैं हाथ जोड़ता हूँ यहाँ से जाइये

वो बोला ऐसे नहीं जाऊंगा
आपका हुकम मान कर अपना फ़र्ज़ निभाऊंगा
कोई और "हुकम मेरे आका"

अब मैं फंस गया भाई
आगे कुआं पीछे खाई
मैंने सोचा हरमिंदर भाई किसी तरह इससे पीछा छुड्वाओ
मैंने उसे आदेश दिया कि
कहीं से ओसामा बिन लादेन को पकड़ कर लाओ
पांच करोड़ का इनाम पाएंगे
ऐश भी करेंगे और मकान भी बनायेंगे
वो बोला पांच करोड़ कि तो छोडो
वो तो आपको वैसे ही नहीं मिल पाएंगे
लादेन को पकड़ भी लिया तो
चालीस परसेंट इनकम टैक्स वाले ले जाएँगे
और आप क्या सोचते हैं कि मैं लादेंज को पकड़ कर लाऊंगा
अरे अमरीका की पूरी की पूरी फ़ौज तो उसे पकड़ नहीं पा रही है
मैं कहाँ से पकड़ पाउँगा
कोई और "हुकम मेरे आका"


मैंने कहाँ भाई मेरी एक बहुत बड़ी मुश्किल सुलझाओ
जाओ इन आतंकवादी संगठनों को समझा कर आओ
हर वक्त अलापते हैं अलग राज्य का राग
इनके उग्रवादी फैलाते हैं हिंदुस्तान में दंगा फसाद
जाइये जा कर इन्हें समझाइए
हिन्दुस्तान सोया शेर है इसे मत जगाइए
जिन्न बोला बड़ी मुश्किल में डाल दिया मेरे आका
काश आतंकी संगठन मेरी बात समझ पाता
वो जिद्दी है जिद पर अड़ा है
अमेरीका और ब्रिटेन के समझाने पर भी नहीं समझ रहा है
और ये काम तो मुझसे होगा भी नहीं
मैं इंसानों को समझा सकता हूँ हैवानो को नहीं
कोई और "हुकम मेरे आका"

इतने में न जाने किसने डाला मेरी नींद पे डाका
मैं बिस्तर से उठा आँखे मसली
सामने खड़ी थी पत्नी गुस्से से भरी
मैंने उठते ही पूछा
वो चिराग वो जिन्न कहाँ है
वो कहने लगी
जिन्न का तो पता नहीं साक्षात् देवी यहाँ है
उस दिन से आज तक
मैं उस जिन्न को ढूंढता फिरता हूँ
उससे एक ज़रूरी काम करवाना है
रोटी कपडा और देश की तो छोडो यार
उस देवी से पीछा छुडवाना है

जिगर की आग

जब मैंने सुना ये गाना जिगर मा बड़ी आग है बीडी जलना
हैरान हो गया मैं परेशान हो गया मैं क्योंकि
सुना था की जिगर की आग तो देशभक्तों में थी
जिन्होंने हँसते हँसते देश के लिए जान दे दी
जिगर की आग से अंग्रेजी हुकूमत हिला देते थे
जिस बर्फ पर लिटाया जाता था उस बर्फ को पिघला देते थे
ये जिगर की आग आज की बालिका में कहाँ से आ गयी
और आग भी ऐसी की सिर्फ एक बीडी जला गयी ??


तब मैंने अपने जिगर तो टटोला
जिगर की आग देखने को मन डोला
न मिला जिगर न आग का गोला
तब मैं डाक्टर के पास गया और जा कर बोला
क्या आप मुझे चेक कर के बता सकते हैं
मेरा जिगर या जिगर की आग मुझे दिखा सकते हैं ??
पहले तो उसने मुझे घूरा
फिर कुछ कुछ पहचाना
बोला यहाँ क्या लेने आये हो चले जाओ पागलखाना
वहां से वापस आकर मैं चैन से नहीं बैठ पाया

दूसरे डाक्टर के पास गया उसको भी जा कर यही बताया
डाक्टर समझदार था उसने कुछ इस तरह से समझाया
कि जिगर या जिगर की आग हम एक्स-रे में नहीं देख पाएंगे
इसके लिए हम आपका पोस्टमार्टम करवाएंगे
मैंने कहा डाक्टर साहब मेरी जवानी पे रहम खाओ
वापिस जा रहा हूँ अपनी फीस बताओ
वापिस आ कर मैं सोचता रहा यूँ
काश बिपाशा मिल जाये उसको छू कर देख लूँ
पर ऐसा संभव नहीं था

इसीलिए मैंने कुछ लोगों पर सर्वे किया
मैंने सर्वे किया अपने पड़ोसियों पर दोस्तों पर
रिश्तेदारों पर और जो नतीजा निकल कर आया वो था इस कदर
कि आज आम इंसान की पेट की आग इस तरह जल रही थी
की उसके सामने जिगर की आग बुझ गयी थी
आज इंसान जिगर की आग नहीं
पेट की आग किए लिए भाग रहा है
और अपने परिवार की पेट की आग मिटाने के लिए
दिन का चैन खो चुका है और रातों को जाग रहा है

हिन्दुस्तान

लहू के संग रग रग में बहता बन के हमारी जान
हमारा प्यारा हिन्दुस्तान कि हमको प्यारा हिन्दुस्तान


चार ऋतुएं यहाँ पे आती कभी फूल कभी पतझड़ लाती,
सावन में बरसे बदरा बसंत सभी को खुश कर जाती,
मन में होती हलचल ऐसे जैसे संगीत की तान
हमारा प्यारा हिन्दुस्तान कि हमको प्यारा हिन्दुस्तान


ऋषियों की है पावन भूमि वेदों का यहाँ ज्ञान
गुरद्वारे मंदिर में पूजा मस्जिद में अज़ान
जन्म लेने को गोद में इसकी तरसे है भगवान्
हमारा प्यारा हिन्दुस्तान कि हमको प्यारा हिन्दुस्तान


वतन की खातिर सर को कटा दे ऐसे यहाँ के वीर
आँख उठाये कोई इस पर देते उसको चीर
शूरवीरता और कुर्बानी है इनकी पहचान
हमारा प्यारा हिन्दुस्तान कि हमको प्यारा हिन्दुस्तान


हर धर्म के लोग हैं रहते सब बोलियों का मेल
ईद दिवाली और क्रिसमस होली का हो खेल
जात धर्म को भूल यहाँ पर रहते हैं इंसान
हमारा प्यारा हिन्दुस्तान कि हमको प्यारा हिन्दुस्तान


पावन नदियाँ कल कल करती पर्वत करते शोर
सम्मान करे तिरंगे का और राष्ट्रीय पक्षी मोर
हर ख़ुशी के मौके पे हम गाएँ राष्ट्रीय गान
हमारा प्यारा हिन्दुस्तान कि हमको प्यारा हिन्दुस्तान

टेंशन जारी है

फैली ये समाज में एक नयी बीमारी है
टेंशन जारी है कि भैया टेंशन जारी है...


बच्चों को पढाई की टेंशन,
बड़ो को कमाई की टेंशन
पत्नी के बालों की टेंशन,
प्रेमिका के गालों की टेंशन
टेंशन जारी है कि भैया टेंशन जारी है.....

लालू को चारे की टेंशन,
रेल में भाड़े की टेंशन
शमशान में मुर्दे की टेंशन,
गुडगांव में गुर्दे की टेंशन
टेंशन जारी है कि भैया टेंशन जारी है


शाहरुख़ को क..क...किरण की टेंशन
सलमान को हिरण की टेंशन
संजय को लफड़ों की टेंशन
मल्लिका को कपड़ो की टेंशन
टेंशन जारी है कि भैया टेंशन जारी है


कंजूस को नोटों की टेंशन
नेता को वोटों की टेंशन
हीरो को विलेन की टेंशन
अमरीका को लादेन की टेंशन
टेंशन जारी है कि भैया टेंशन जारी है


व्यापारी को उधार की टेंशन
प्रेमी को प्यार की टेंशन
फूल की माली को टेंशन
कवियों को ताली की टेंशन
टेंशन जारी है कि भैया टेंशन जारी है

नमन

नमन है उन वीरों को हो गए जो कुर्बान
हँसते हँसते देश की खातिर दे दी जिन्होंने जान


रानी झाँसी भगत सिंह और नेता सुभाष
मंगल पांडे तात्या टोपे और अश्फाख उल्लाह खान
नमन है उन वीरों को हो गए जो कुर्बान

किस किस का मैं नाम गिनाऊं कैसे हुए कुर्बान बताऊँ
भरी जवानी में जो आये मातृभूमि के काम
नमन है उन वीरों को हो गए जो कुर्बान

पहन बसंती रंग का जामा वन्दे मातरम गा के गाना
हँसते हँसते फंसी चढ़ गए बढाई देश की शान
नमन है उन वीरों को हो गए जो कुर्बान

वरदान

नहीं जाता माँ मैं वैष्णव देवी
क्योंकि वैष्णव सबरूप मेरी जन्मदाती मेरी माँ मेरे घर पे है,
नहीं जाता मैं हरिद्वार कांवड़ लेने
क्योंकि शंकर सबरूप मेरे पिता मेरे घर पे हैं,
नहीं जाता मैं गुरूद्वारे इसके लिए भी मांगता माफ़ी मैं,
क्योंकि मेरे गुरु ने जो मंत्र दिया उसका सिमरन ही काफी है,
तेरे दर पे झुका हूँ देना हो तो इतना मान देना
कि श्रवण कुमार की तरह माँ बाप की सेवा कर पाऊं
बस यही वरदान देना