मंगलवार, 2 अक्तूबर 2012

ग़ज़ल

आग में तन भुना जा रहा है!
दुःख मगर अनसुना जा रहा है!! 
छोड़कर माँ चली जाये खुद ही!
जाल घर में बुना जा रहा है!!
लुट रही हर घडी भारती माँ!
जेब से सौ गुना जा रहा है!!
जिंदगी भर न वो सोच पाया! 
जो कहा जो सुना जा रहा है!!
लूटकर खा गया देश को जो!
फिर वो नेता चुना जा रहा है!! 
उम्र भर बोलता सच रहा जो!
"पाल"क्यूँ  वो धुना जा रहा है!! 

ग़ज़ल

मत भला कीजिये सोचिये तो सही! 
दिल बड़ा कीजिये सोचिये तो सही!!
मन दुखाया किसी ने अगर भूल से!
मत क्षमा कीजिये सोचिये तो सही!!
साथ चलना मेरे फर्ज है आपका!
मत अदा कीजिये सोचिये तो सही!! 
नरम है दिल बहुत ए मेरी दिलरुबा!
मत वफ़ा कीजिये सोचिये तो सही!!
दम घुटा जा रहा साँस थमने लगी!
मत दवा कीजिये सोचिये तो सही!!
"पाल" की बात सुनकर मेरे यार तुम! 
मत हंसा कीजिये सोचिये तो सही!!